34 साल बाद बदली नेशनल एजुकेशन पॉलिसी को ऐसे समझें… इसमें वो सबकुछ है,

  1. 34 साल पहले, 1986 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाई गई थी। तीन दशक से इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ
  2. नई शिक्षा नीति में GDP का 6% हिस्सा एजुकेशन सेक्टर पर खर्च किए जाने का लक्ष्य रखा गया है

देश मे बुधवार दिनांक 29/07/2020 को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (new national education policy) मे बड़ा बदलाव किया गया इस नयी कार्य प्रणाली को केंद्रीय केबिनेट ने मंजूरी दे दी 35 वर्ष के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय एचआरडी का नाम बदलकर दुबारा शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है

एक प्रवेश परीक्षा, एक जैसी फीस

  1. मानव संसाधन विकास मंत्रालय होगा शिक्षा मंत्रालय
  2. इसी सत्र से बदलाव लागू करने की तैयारी
  3. एक प्रवेश परीक्षा एक जैसी फीस
  4. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020
  5. उच्च शिक्षा में यह सुधार
  6. कोर्स

कोर्स

केमिस्ट्री और मेथ्स के साथ फ़ैशन डिजाइनिंग

  1. मौजूदा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत फिजिक्स ऑनर्स के साथ केमिस्ट्री मैथ्स लिया जा सकता है इसके साथ फैशन डिजाइनिंग नहीं ली जा सकती थी लेकिन नई नीति में ऐसा संभव होगा
  2. अब केमिस्ट्री और मैथ के साथ फैशन डिजाइनिंग ली जा सकेगी
  3. आईआईटी जैसे संस्थान कला और मानविकी के साथ समग्र वह बहू विषयक शिक्षा की ओर बढ़ेंगे
  4. तरह कला और मानविकी के छात्र अधिक विज्ञान सीखेंगे
  5. पाठ्यक्रम नहीं बल्कि विश्वविद्यालय बहु-विषयक होंगे सभी छात्र वोकेशनल विषय और सॉफ्ट स्किल पड़ेंगे

नियमन

एक फ्रेमवर्क से पाठ्यक्रम फीस भी की जाएगी तय

  1. सरकारी और निजी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए एक समान मानदंड तय किए जाएंगे
  2. इसका अर्थ यह है कि नियामक के फ्रेमवर्क में ही पाठ्यक्रम का शुल्क निर्धारित होगा और इसके अतिरिक्त कोई भी शुल्क छात्रों से नहीं लिया जा सकेगा

शोध पर जोर

  1. उच्च शिक्षण संस्थानों को शोध के केंद्र की श्रेणियों में विभाजित किया जाएगा संस्थानों का दायरा बढ़ाया
  2. आई -आईटी और मैनेजमेंट संस्थानो को भी बहु-विषयक बनाने की दिशा मे कार्य किया जाएगा

एडमिशन

देश में एक ही प्रवेश परीक्षा एमफिल हुई खत्म

  1. सभी उच्च शिक्षण संस्थानों या कॉलेजों में प्रवेश के लिए एक ही परीक्षा होगी
  2. यह परीक्षा एनटीए (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) लेगी इस एजेंसी का गठन पहले ही हो चुका है
  3. एमफिल पाठ्यक्रमों को बंद कर दिया गया शोध के लिए एमफिल की अनुमति नहीं दी जाएगी
  4. अब तक एमफिल पीएचडी और परास्नातक के बीच की सीढ़ी मानी जाती थी
  5. लीगल व मेडिकल कॉलेजों को छोड़कर सभी उच्च शिक्षण संस्थानों का संचालन सिंगल रेगुलेटर के जरिए होगा
  6. विधालय शिक्षा में यह होंगे बदलाव

मंत्रालय

तीन भाषा फार्मूला पाँचवी तक की पढ़ाई मातृभाषा में

  1. पांचवी तक की पढ़ाई मातृभाषा में ही करवाई जाएगी
  2. शिक्षा में तीनभाषा के फार्मूले को आगे बढ़ाया जाएगा
  3. इसमें संस्कृत को प्रमुखता से शामिल किया जाएगा
  4. स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक में इसे प्रमुखता से जगह दी जाएगी
  5. छठी कक्षा से ही वोकेशनल शिक्षा पर जोर दिया जाएगा
  6. स्कूलों में कला, वाणिज्य, विज्ञान की स्ट्रीम में, बटवारा नहीं होगा छात्र जो भी पाठ्यक्रम चाहे ले सकते हैं

परीक्षा

बदलेगा बोर्ड परीक्षाओं का पैटर्न

  1. बोर्ड परीक्षा के पैटर्न में बड़ा बदलाव आएगा
  2. सीबीएसई की बात करें तो गणित विषय की तरह सभी विषय दो भाषा में पढ़ाए जाएंगे
  3. राज्यों की बोर्ड परीक्षा ज्ञान के अनुप्रयोग को जांचने पर आधारित होगी ना कि रटने की क्षमता पर
  4. हर विषय के लिए वस्तुगत और विवरणात्मक दोनों तरह की परीक्षा होगी
  5. कक्षा 6 से ही व्यावसायिक शिक्षा और इंटरशिप भी होगी
  6. व्यवसायिक शिक्षा की परीक्षा का स्वरूप भी कौशल को परखने वाला होगा

मूल्यांकन

रिपोर्ट कार्ड में शिक्षकों के साथियों का मूल्यांकन होगा

  1. प्रोग्रेस कार्ड 360-degree संपूर्ण होगा
  2. रिपोर्ट कार्ड में शिक्षकों के अलावा साथियों और छात्रों द्वारा भी मूल्यांकन किया जाएगा
  3. इसका मकसद छात्रों के लर्निंग आउटपुट के साथ संपूर्ण विकास का मूल्यांकन होगा
  4. क्विज, खेल और व्यावसायिक शिल्प से जुड़े विभिन्न संवर्धन गतिविधियों के लिए बिना बसते वाले दिन (बैगलैस डेज )को प्रोत्साहन
  5. नई शिक्षा नीति के जरिए ज्यादा किताबों की जगह बच्चों के संपूर्ण विकास पर जोर

स्कूली शिक्षा की नई व्यवस्था

अब 10+2 की जगह लेगा 5+3+3+4

  1. नई नीति में स्कूली शिक्षा के ढांचे में बड़े बदलाव का प्रस्ताव किया गया है इसके तहत अब 10 + 2 की मौजूदा व्यवस्था की 5+3+3+4 की व्यवस्था शुरू की जाएगी
  1. इससे पहले 3 साल प्री प्राइमरी या स्कूल पूर्व पढ़ाई की व्यवस्था होगी इसके बाद पहली और दूसरी कक्षा होगी इन 5 वर्षों के बाद 3 साल के पढ़ाई तीसरी से लेकर पांचवी कक्षा की होगी इसे प्रीपरेटरी स्टेज कहा जाएगा
  1. अगले 3 साल यानी कक्षा 6 से 8 तक को मिडिल कहा जाएगा और 9वीं से 12वीं तक के 40 साल सेकेंडरी स्कूल कहे जाएंगे स्कूल में आर्ट साइंस और कॉमर्स आदि में बांटने की सख्त व्यवस्था नहीं होगी बल्कि छात्रों को अपने मनपसंद विषय लेने की छूट होगी

बैगलैस दिवसों को प्रोत्साहन

सालभर बैगलैस दिवसों को प्रोत्साहित किया जाएगा बच्चों को समृद्ध करने वाली गतिविधियां जैसे कला, क्विज , खेल कूद और वोकेशनल क्राफ्ट कराई जाएंगी

भाषाओं का चयन कर सकेंगे छात्र

  • तीन भाषाओं का चयन राज्य क्षेत्र और छात्र अपनी इच्छा अनुसार कर सकेंगे अब तक तीन में से दो भारतीय भाषाएं होती थी

मेजर माइनर व्यवस्था

  1. मौजूदा शिक्षा नीति के तहत फिजिक्स ऑनर्स के साथ केमिस्ट्री मैथ्स लिया जा सकता है इसके साथ फैशन डिजाइनिंग नहीं ली जा सकती थी लेकिन नई नीति में मेजर और माइनर की व्यवस्था होगी जो मेजर प्रोग्राम है उसके अलावा माइनर प्रोग्राम भी लिए जा सकते हैं
  2. संस्थानों का पाठ्यक्रम ऐसा होगा कि सार्वजनिक संस्थानों के विकास पर उसमें जोर दिया जाए संस्थानों के पास ओपन डिस्टेंस लर्निंग और ऑनलाइन कार्यक्रम चलाने का विकल्प होगा
  3. अब कला, संगीत, शिल्प, खेल, योग, सामुदायिक सेवा जैसे सभी विषयों को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा इन्हें सहायक पाठ्यक्रम नहीं कहा जाएगा
  4. केंद्रीय विद्यालयों में प्री स्कूल सेक्शन कम से कम 1 साल के लिए चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन को कवर करेगा

शिक्षा नीति लाने की जरूरत क्यों महसूस की गई?

  • इससे पहले की शिक्षा नीति 1986 में बनाई गई थी। उसमें ही संशोधन किए गए थे। लंबे समय से बदले हुए परिदृश्य में नई नीति की मांग हो रही थी। 2005 में कुरिकुलम फ्रेमवर्क भी लागू किया गया था।
  • एजुकेशन पॉलिसी एक कॉम्प्रेहेंसिव फ्रेमवर्क होता है जो देश में शिक्षा की दिशा तय करता है। यह पॉलिसी मोटे तौर पर दिशा बताता है और राज्य सरकारों से उम्मीद है कि वे इसे फॉलो करेंगे। हालांकि, उनके लिए यह करना अनिवार्य नहीं है।
  • ऐसे में यह पॉलिसी सीबीएसई तो लागू करेगी ही, राज्यों में अपने-अपने स्तर पर फैसले लिए जाएंगे। यह बदलाव जल्द नहीं होंगे बल्कि इसमें समय लग सकता है। यह एक प्रक्रिया की शुरुआत के तौर पर देखा जाना चाहिए।
  • स्कूल शिक्षा के लिए नेशनल करिकुलर फ्रेमवर्क के तौर पर स्कूल करिकुलम (एनसीएफएसई) का ओवरहॉल किया गया था। इसे नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एऩसीईआरटी) करेगा। एनसीएफएसई के आधार पर किताबों का रिवीजन होगा। एनसीईआरटी ने 2014 के बाद से दो बार स्कूल की टेक्स्टबुक का रिवीजन किया है।

आप समस्त सरकारी योजनाओ की जानकारी अपने मोबाइल पर घर बेठे भी ले सकते है

इसके लिए आपको सबसे पहले आपको अपने मोबाइल फोन मे TELEGRAM  INSTALL करना होगा

फिर हमारा टेलीग्राम चैनल join करना होगा

यदि आपके मोबाइल में टेलीग्राम इंस्टॉल  है तो निचे दिए गए लिंक पर क्लिक करे

TELEGRAM INSTALLCLICK HERE

NOTE – यदि आपने टेलीग्राम ऐप इनस्टॉल नहीं किया हुआ है तो पहले प्ले स्टोर

से टेलीग्राम इनस्टॉल कर ले उसके बाद चैनल ज्वाइन करे |