राजस्थान पुलिस निरन्तर प्रयासरत है की पुलिस व्यवस्था व पुलिस कार्य प्रणाली प्रजातांत्रिक मूल्यों के अनुरूप गुणात्मक परिवर्तन आये व पुलिस जनहित की अवधारणा से प्रेरित होकर कार्य करें। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु यह आवश्यक है कि समाज के विभिन्न क्षेत्र में नागरिकों का सहयोग पुलिस को निरन्तर प्राप्त हो समाज में ऐसे स्वप्रेरित व्यक्तियों की कमी नहीं है जो स्वेच्छा से किसी न किसी क्षेत्र में अपना योगदान समाज को देना चाहते हैं। पुलिस मित्र योजना का उद्देश्य ऐसे स्वप्रेरित व्यक्तियों को जोड़ना है जो पुलिस के साथ कन्धे से कंधा  मिलाकर सामाजिक व जनहित के कार्यों में पुलिस के सहभागी के रूप में कार्य करें। पुलिस मित्र योजना से जनता व पुलिस के बीच सामंजस्य समन्वय की होगी जिससे एक भय व अपराध मुक्त समाज की स्थापना में गति व निरन्तरता बनी रहेगी। 

 परिचय:

 पुलिस मित्र योजना के तहत् कोई भी भारतीय नागरिक जो राजस्थान में निवासरत है।आवेदन पत्र में चौबीस दिये हुए क्षेत्रों में से ऐसे क्षेत्र चुन सकते हैं।जिनमें वो अपना योगदान देना चाहते हों।।इस हेतु राजस्थान पुलिस वेब पोर्टल पर आवेदन किया जा सकता है।आवेदन स्वीकार होने पर सम्बन्धित थाने से समन्वय कर राजस्थान पुलिस मित्र के रूप में अपनी सेवाऐं दे सकते हैं। 

पंजीकरण की प्रक्रिया:

  1. आवेदक राजस्थान पुलिस वेब पोर्टल www.police.rajasthan.gov.in पर जाकर पुलिस मित्र के लिंक पर क्लिक करें।
  2. ऐसा करने पर पुलिस मित्र का आवेदन पत्र खुल जायेगा।
  3. आवेदन पत्र में विवरण भरने के पश्चात् ‘सेव के ऑप्शन पर क्लिक करें।
  4. ऐसा करने पर स्वतः ही आवेदन पत्र सम्बन्धित थानाधिकारी के पास पहुँच जायेगा।
  5. थानाधिकारी वेब पोर्टल पर अपने आई डी से लॉगिन कर यह आवेदन पत्र देखेंगे और थाने के रिकॉर्ड से आवेदन में भरे गये विवरण का सत्यापन करेंगे।
  6. सही पाये जाने पर आवेदन पत्र को थानाधिकारी द्वारा स्वीकार किया जायेगा। आवेदन पत्र स्वीकार होते ही जरिये मैसेज आवेदक के पास सूचना पहुँच जायेगी कि वह राजस्थान पुलिस मित्र के रूप में अपनी सेवाऐं दे सकते हैं।

पुलिस मित्र योजना हेतु पात्रताः

  1. भारतीय नागरिक हो ।
  2.  आपराधिक असामाजिक, अवांछनीय गतिविधियों में लिप्त नही हो।
  3.  राजनीति में सक्रिय नहीं हो।
  4. आयु 18 वर्ष से ऊपर हो।

 राजस्थान पुलिस मित्र की विशेषताऐं:

  1.  समुदाय की सेवा के लिए सदैव तत्पर।
  2.  सुरक्षा और यातायात नियमों का पालक।
  3.  ईमानदारी, समयबद्धता और समर्पण के सिद्धांतों का पालक ।
  4.  अपराधों को रोकने में पुलिस की सहायता हेतु संकल्पित ।
  5.  कानून-व्यवस्था बनाएं रखने एवं यातायात नियमों की पालना में पुलिस का सहभागी।
  6.  स्थानीय समस्याओं के समाधान हेतु विचारशील ।
  7. राजकीय संपत्ति की सुरक्षा हेतु चिंताशील ।
  8. जरूरतमंदों की सहायतार्थ कटिबद्ध
  9.  अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग ।
  10.  सदैव मानव सेवा के लिए तत्पर ।
  11. पुलिस मित्र के रूप में उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करने हेतु समर्पित।

 निम्न विषय जिनमें सेवाएं अपेक्षित है।

  1. अपराध की रोकथाम।
  2. जागरूकता अभियान ।
  3. अपराध जागरूकता अभियान।
  4. यातायात सहायता और जागरूकता।
  5. अतिक्रमण, बाल, दूव्र्यवहार या अन्य असामाजिक गतिविधियों सम्बन्धित जागरूकता।
  6. मानव अधिकार जागरूकता ।
  7. महिला अधिकार जागरूकता।
  8. साईबर क्राईम एवं बैंक ठगी हेतु जागरूकता।
  9. एंटी नारकोटिक्स अभियान।
  10. समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए अभियान।
  11. धार्मिक उत्सवों
  12. वैवाहिक विवाद हस्तक्षेप और परामर्श
  13. पीड़ित सहायता कार्यक्रम।
  14. पुलिस जनता खेल कार्यक्रम
  15. – कैदी व अन्य निषेध अपराधियों का पुनर्वास।
  16. पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम ।
  17.  सांप्रदायिक सद्भाव के प्रोत्साहन हेतु अभियान।
  18. आपराधिक सूचनाऐं प्रदान करना।
  19. सोशल मीडिया विषयों में सहायता।
  20. चिकित्सकीय क्षेत्र में सहायता।
  21.  शैक्षणिक क्षेत्र में सहायता।

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आवश्यक दिशा-निर्देश:

 1. राजस्थान पुलिस मित्र योजना हेतु सीएलजी मीटिंग व जन सहभागिता बैठक के दौरान इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार हो ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग पुलिस मित्र बनने हेतु प्रेरित हों।

 2. समस्त प्रकार के मीडिया जैसे इलेक्ट्रोनिक प्रिन्ट व सोशल मीडिया द्वारा इस योजना के बारे में विस्तार से प्रचार-प्रसार हो।

 3. थानाधिकारी प्रतिदिन राजस्थान पुलिस मित्र के तहत आने वाले अनलाईन आवेदनों को देखे एवं उनका सत्यापन 7 दिवस में सुनिश्चित करें।

 4. थानाधिकारी थाने के पुलिस मित्रों के बारे में सम्पूर्ण जानकारी रखें एवं अपने विवेक से समयानुसार कहाँ उनका योगदान लेना है, इसका निर्णय लें, ताकि इस योजना का समुचित लाभ मिल सकें। 5. थानाधिकारी सोशल मीडिया जैसे टिवटर, फेसबुक, व्हाट्सप्प एवं इन्स्टाग्राम द्वारा पुलिस मित्रों का एक ग्रुप बनाकर उनसे निरन्तर सम्पर्क बनाये रखेंगे। 

6. बीट कांस्टेबल  अपनी बीट के पुलिस मित्रों का रिकॉर्ड रखें एवं उनसे सम्पर्क बनाये रखें। बीट कांस्टेबल  अपनी बीट में पुलिस मित्रों का विभिन्न क्षेत्रों में योगदान ले एवं लोगों को इस योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित करें। 

7. पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं वृत्ताधिकारी अपराध समीक्षा बैठक में पुलिस मित्र की संख्या व उनके द्वारा किये गये योगदानों का लेखा-जोखा थानाधिकारी से प्राप्त करें एवं इस योजना का पर्यवेक्षण करेंगे।

 8. थानाधिकारी पुलिस मित्र द्वारा किये गये योगदानों का पूर्ण विवरण मय  फोटोग्राफ आदि रखें। 

9. सीएलजी सदस्यों के चयन के दौरान अच्छा कार्य करने वाले पुलिस मित्रों को वरीयता दी जाए व समुचित स्तर पर पुरस्कृत भी किया जायें। 

10. पुलिस मित्र की संख्या पर कोई पाबन्दी नहीं है। इसलिए ज्यादा से ज्यादा संख्या में लोगों को इस योजना से जोड़ने का प्रयास करना चाहिए।

 11. कोई भी पुलिस मित्र अगर अपने पुलिस मित्र के पद व प्रतिष्ठा का दुरुपयोग करता पाया जाता है तो थानाधिकारी उसे तुरन्त पुलिस मित्र से निष्कासित करेंगे एवं इसकी सूचना कारण बताते हुए जिला पुलिस अधीक्षक को भेजेंगे।